मुझे आज भी याद है
हर तरफ पानी था नमी थी मुझे आज भी याद है,
हर नजर कुछ सहमी थी मुझे आज भी याद है,
धूप भी थी और अंधेरा भी हो गया था उस रोज,
लोग काम न आये जीवन के कुछ ऐसे कठीन थे वो मोड़,
आँख के आगे कुछ हरा सा दिख रहा था,
धीरे धीरे मेरा तन भी दुख रहा था,
कोई ना आया मुझे बचाने को , अब तो मंजर भी धुंधला दिख रहा था,
अब तो मन भी हार रहा था मुझे आज भी याद हैं,
मुझे याद है कुछ नजरें उठी जरूर थी मेरे संघर्ष को देख कर,
फिर मुड़ गयी या झूक गयी मदद ना करनी पड़े ये समझ कर,
इतना तो मुझे भी मालूम था कि कोई अपना नहीं है वहाँ,
औरों की तरफ ही देख रहा था मदद की गुहार में,
पर कौन आता, कुछ को आता होगा तैरना भी, पर कौन आता,
अब हौसला जवाब देने लगा था, साँसों में पानी था,
मैं अपने नसीब को इतने करीब से देखने का कहाँ आदी था,
डर और कपकपी का एक कफ़न था,
मुझे आज भी याद है,
मुझे आज भी याद है, अब मैं गंगा में समाने को तय्यार था,
बाहें तो पहले ही फैली थी , बस गल्ले लगने का ही ख्याल था,
ये दर्द कैसे कम हो मेरा खुद से बस यही सवाल था,
कैसे होंगे अगले कुछ पल ये भी एक तनाव था,
मुझे आज भी याद है,
झूठ बोलते हैं वो लोग जो कहते हैं कि ज़िन्दगी के पल फिल्म की तरह दिखते हैं,
यहाँ तो रौशनी भी नहीं दिख रही थी,
अब भी में जीना चाहता था अपने सपनो के लिए, अपने अपनों के लिए,
पर अब कुछ बचा नहीं था करने को मुझे आज भी याद है, मुझे आज भी याद है |
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