आँखें
पानी है या समंदर का सैलाब,
कशिश है या अपनों की पहचान,
पर्दा है या संसार का दर्पण,
शायद एहसास है उस खुदा का,
नज़रें, कितना कुछ देखती है,
कितना कुछ समझती है,
फिर भी थकती कहाँ है ये नजरें..
कहती हैं बहुत कुछ , सहती हैं सब कुछ,
फिर कभी कभी नम सी हो जाती है ये नजरें..
देखना चाहती हैं ये क्या है?
सब इसी की तो दुआ है..
आँखें कुछ किम्मत भी तो नहीं मांगती,
बस एक जज्बा रखती है उस आसमान को छूने का,
उस गहराई को देखने का,
इंतजार करती है सूरज की उस आखिरी किरण के जाने का,
(इंतजार भी है और आगाज़ भी है, इन नजरों को तेरे होने का एहसास भी है)
पानी है या समंदर का सैलाब,
कशिश है या अपनों की पहचान,
पर्दा है या संसार का दर्पण,
शायद एहसास है उस खुदा का,
नज़रें, कितना कुछ देखती है,
कितना कुछ समझती है,
फिर भी थकती कहाँ है ये नजरें..
कहती हैं बहुत कुछ , सहती हैं सब कुछ,
फिर कभी कभी नम सी हो जाती है ये नजरें..
देखना चाहती हैं ये क्या है?
सब इसी की तो दुआ है..
आँखें कुछ किम्मत भी तो नहीं मांगती,
बस एक जज्बा रखती है उस आसमान को छूने का,
उस गहराई को देखने का,
इंतजार करती है सूरज की उस आखिरी किरण के जाने का,
(इंतजार भी है और आगाज़ भी है, इन नजरों को तेरे होने का एहसास भी है)
Amazing
ReplyDeleteLovelyyyyy...finally you did...please continue :-*
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