अब सुबह होने को है

अश्क़ ना होते अगर तो क्या वो आँखें होती,
दिल ना दुःखते अगर तो क्या ये सांसें होती,
हवा की नमी की परवाह करते थोड़ी अगर,
तो यूं झुलस जाने के बाद कम्भख्त ना बारिश होती,

आवाम में एक चेहरा है,
वक़्त का एक पहरा है,
गुज़र गया ज़ाहिर क्या करना,
गुजरा नहीं तो कायम क्या करना,

राहत की आहट भी ना अब होती है,
ये आँखें सोते हुवे भी ना सोती है,
अब उन् कदमो की आवाज ना होती है,
हर माँ अपने बचे से दूर होक रोती है,

ना सफर का सफरनामा है,
ना दुःख का कोई पैमाना है,
मेरी कलम की स्याही को अब बस कुछ लम्हो ने थामा है,

अब सुबह होने को है,
हर तरफ एक सन्नाटा है,
सूरज की पहली किरण से पहले एक ठण्ड का ठहाका है,
उठने पे फिर एक जंग का ऐलान होगा,
कोई जीतेगा तो कोई हार के नाम होगा,
बस जान लो इतनी सी बात कि हर रात के बाद सूरज का आगाज़ होगा,

KEEP SAFE !
Jeet ab jeene main hai or jeetega wahi to jeeyega :) 



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